छत्तीस कुल वाले क्षत्रियों को चार शाखायें निम्न प्रकार विभाजित हैं
सूर्य वंश:-
रवि के दसः राठौड़,कछवाहे,गहरवार, बैंस, गौर, सिसौदिया, बढ़ गूजर, रक्षक, सेंगर. सिरनेत ।
चन्द्र वंश:-
चन्द्र के दस जांदों, तंवर, चन्देल, पांडु, बघेल सोमवंशी, भाटी, कृष्णतिल, नदवानी, झाला ।
मुनि वंश:-
ऋषियों के बारह शिववंशी, वणदिया, दीखत, नाग वंशी, बाच्छिल, विशेन काफुन, सकेत, भृगुवंशी, गर्गवशी, कदम्ब, धाकरे।
अग्नि वंश:-
अग्निवंश के चार परिहार, चौहान, सोलंकी, प्रमार (पवार), भारतवर्ष के पुरातत्व वेओं ने क्षत्रिय जाति के तीन वंश वाले और तेरह वंश वाले छत्तीस कुल प्रधान माने हैं शेषु सब इन्हीं की शाखा प्रशाखायें हैं छत्तीस।
इतिहासकार जेम्स टांड के अनुसार क्षत्रियो की सूची से छत्तीस
1. इक्ष्वाकु सूर्य, 2. चन्द्र उर्फ इन्दु, 3. ग्हिलोत 4. यदु 5. तवर 6. राठौड़, 7. कछवाया, 8. प्रमार, 9. चौहान,
10. सोलंकी उर्फ़ चालूक, 11. परिहार, 12. चावड़ा, 13. टांक उर्फ तक्षक, 14 जिट व जेटी, 15 हन व हुण, 16. काठी 17. बाला 18. झाला, 19. गोहिल, 20. सविया, 21.सिलोर, 22. डावी, 23. गोर, 24. डोडा उर्फ डोड़, 25. गेहरवाल, 26. बड़गूजर, 27. सेंगर 28. सिकरवार, 29. बेस,30. दाहिमा, 31. जोहिया, 32. मोहिल, 33. निकुम्भ
34. राजपालो, 35. डाहिमा उर्फ दाहरिया, 36.जैनुल कामरी।
नोट:-इसके अलावा बहुत से गोष रह गये हैं ।इतिहास पृथ्वीराज रसो श्री मानिक राव जी द्वारा २४ उप म्न शाखाएँ से ७ चन्द्रवरदाई
नोट-इसके अलावा बहुत से गोत्र रह गये हैं ।
सूर्य वंश:-
रवि के दसः राठौड़,कछवाहे,गहरवार, बैंस, गौर, सिसौदिया, बढ़ गूजर, रक्षक, सेंगर. सिरनेत ।
चन्द्र वंश:-
चन्द्र के दस जांदों, तंवर, चन्देल, पांडु, बघेल सोमवंशी, भाटी, कृष्णतिल, नदवानी, झाला ।
मुनि वंश:-
ऋषियों के बारह शिववंशी, वणदिया, दीखत, नाग वंशी, बाच्छिल, विशेन काफुन, सकेत, भृगुवंशी, गर्गवशी, कदम्ब, धाकरे।
अग्नि वंश:-
अग्निवंश के चार परिहार, चौहान, सोलंकी, प्रमार (पवार), भारतवर्ष के पुरातत्व वेओं ने क्षत्रिय जाति के तीन वंश वाले और तेरह वंश वाले छत्तीस कुल प्रधान माने हैं शेषु सब इन्हीं की शाखा प्रशाखायें हैं छत्तीस।
इतिहासकार जेम्स टांड के अनुसार क्षत्रियो की सूची से छत्तीस
1. इक्ष्वाकु सूर्य, 2. चन्द्र उर्फ इन्दु, 3. ग्हिलोत 4. यदु 5. तवर 6. राठौड़, 7. कछवाया, 8. प्रमार, 9. चौहान,
10. सोलंकी उर्फ़ चालूक, 11. परिहार, 12. चावड़ा, 13. टांक उर्फ तक्षक, 14 जिट व जेटी, 15 हन व हुण, 16. काठी 17. बाला 18. झाला, 19. गोहिल, 20. सविया, 21.सिलोर, 22. डावी, 23. गोर, 24. डोडा उर्फ डोड़, 25. गेहरवाल, 26. बड़गूजर, 27. सेंगर 28. सिकरवार, 29. बेस,30. दाहिमा, 31. जोहिया, 32. मोहिल, 33. निकुम्भ
34. राजपालो, 35. डाहिमा उर्फ दाहरिया, 36.जैनुल कामरी।
भारत के प्राचीन रजवंश
नोट:-इसके अलावा बहुत से गोष रह गये हैं ।इतिहास पृथ्वीराज रसो श्री मानिक राव जी द्वारा २४ उप म्न शाखाएँ से ७ चन्द्रवरदाई
| नाम | गोत्र | वंश | निवास स्थान |
|---|---|---|---|
| सूर्यवंश | भारद्वाज | सूर्यवंश | बुलन्द शहर , आगरा , मेरठ |
| कछवाया | मानव | सूर्यवंश | जयपुर,ग्वालियर इत्यादि |
| राठौड़ | कश्यप | सूर्यवंश | जोधपुर, बीकानेर पूर्व मालवा |
| सिसोदिया | वेजपायण | सूर्यवंश | ------ |
| गहलौत | वेजपायण | सूर्यवंश | मथुरा , कानपुर |
| सौमबंशी | अत्रि | चन्द्र | प्रतापगढ़, हरदोई |
| यदुवंश | अत्रि | की शाखा | राजस्थान करोली |
| भाटी | अत्रि | जादौन की शाखा | महाराजा जैसलमेर |
| जाडेजा | ---- | यदुवंश की शाखा | महाराजा कच्छ व भुज |
| यादव | --- | जादौन की की शाखा | अवागढ़, कोटला, उभरगढ़,आगरा |
| तोमर | वयाग्र | चन्द्र वंश | पाटन के राव,तवरघर,जिला-ग्वालियर |
| पालीवार | वयाग्र | तोमर की शाखा | गोरखपुर वगैरह |
| परिहार | कौशल | छग्निवंशी | उरई इत्यादि |
| तखी | ---- | परिहार की शाखा | ---- |
| पंवार | वशिष्ठ | परिहार की शाखा | मालवा, धौलपुर, मेवाड़ |
| सोलंकी | भारद्वाज | परिहार की शाखा | राजपूताना, मालवा, एटा |
| सोलंकी | भारद्वाज | परिहार की शाखा | राजपूताना, मालवा, एटा |
| चौहान | वत्स | परिहार की शाखा | राजपूताना, मालवा, एटा |
| खिची | वत्स | चौहान की शाखा | खीची बाड़ा |
| हाड़ा | वत्स | चौहान की शाखा | खीची वाड़ा, ग्वालियर, मालवा |
| भदौरिया | वत्स | अग्नि वंश शाखा चौहान | नौगवां,भदावर,आगरा |
| देवड़ा | ... | .... | राजस्थान सिरोही राज्य |
| सम्भरी | .... | .... | नीमराणा रानी का रायपुर |
| बच्छगोती | .... | .... | प्रतापगढ़, सुल्तानपुर |
| राजकुमार | .... | .... | बुड़वार, फतेहपुर जिला बहरोलिया |
| पवेय्या | .... | .... | ग्वालियर |
| गौर व गौड़ | भारद्वाज | सूर्य | शिवगढ़ रायबरेली कानपुर |
| बेंस | भारद्वाज | चन्द्र | हरदोई उन्नाव बांदा पूर्व में |
| कनपुरिया | भारद्वाज | ब्रह्मक्षत्रिय | अवध राज्य के जिलों में |
| गहरवार | कश्यप | सूर्य | उन्नाव रायबरेली मैनपुरी |
| विसेने | वत्स | ब्रह्म क्षत्री | गाजी,गोरखपुर,बस्ती |
| निकुम्ब | वशिष्ठ | सूर्य | गोरखपुर आजमगढ़ बस्ती |
| सिरनेत | भारद्वाज | सूर्य | |
| कटहरिया | वशिष्ठ | सूर्य | बरेली,मुरादाबाद,बदांयू |
| वाच्छिल | अत्रि | चन्द्र | मथुरा,बुलंदशहर,शाहजहांपुर |
| बड़गूजर | वशिष्ठ | सूर्य | अनूपशहर,एटा,अलीगढ़ |
| झाला | मरीच (कश्यप) | चन्द्र | धागधरा,मेवाड़,कोटा |
| रैकबार | भारद्वाज | सूर्य | बहराइच, बाराबंकी |
| करचुल (हैहय) | कश्यप | चन्द्र | बलिया, फैजाबाद |
| चंदेल | चन्द्रायन | चन्द्र | गिन्नौर, कानपुर, डुदेलखंड |
| जनवार | कौशल | सोलंकी | बलरामपुर व अवघके जिले |
| सेंगर | गौतम | ब्रहाक्षत्री | इटावा, जालौन |
| बहरोलिया | भारद्वाज | शाखा सिसोदिया | रायबरेली,बाराबंकी |
| दीक्षित | कश्यप | शाखा सूर्यवंश | उन्नाव, बस्ती, प्रतापगढ़ जौनपुर |
| सिलार | सौनिक | चन्द्रवंश | सूरत |
| सिकरवार | भारद्वाज | बड़गूजर | ग्वालियरआगरा फतेहपुर सीकरी |
| सुखार | गर्ग | सूर्य | उत्तराखण्ड पूर्व दिशा में |
| सरवईया (सविया) | वशिष्ठ | यदु | काठियावाड़ |
| मोरी | ब्रह्मगोत्र | सूर्य | मथुरा, आगरा,बुलन्दशहर |
| टांक | सौनिक | नागवंश | मैनपुरी पंजाब |
| कोशिक | कौशिक | चन्द्र | बलिया, आजमगढ़, गोरखपुर |
| पड़हरिया | सोम | ब्रह्मक्षत्रिय | ----- |
| बनाफर | पाराशर | चंद्र | बुन्देलखण्ड, बांदा, बनारस |
| दाहिया | गर्ग | ब्रह्मक्षत्रीय | काठियाब |
| पुडीर | कपिल | ब्रह्मक्षत्रीय | पंजाब,गुजरात यू०पी० |
| निर्वाण | वत्स | चौहान शाखा | ----- |
| कटारिया | भारद्वाज | सोलंकी | झाँसी, मालबा, बलिया |
| गोहिल | वेशवपाइन | गहलौत | काठियाबाड़ |
| बुन्देला | कश्यप | गहरवार | बुन्देलखण्ड के रजवाड़े |
| काठी | कश्यप | गहरवार | काठियावा मलासी बांदा |
| इन्दौलिया | व्याघ्र | तोमर | आगरा, मथुरा |
| छोंकर | अजेय | यदु | आगरा वगैरह |
| चोलबंशी | भारद्वाज | सूर्य | दक्षिण मद्रास में |
| निमिबंशी | कश्यप | सूर्य | मिर्जापुर, अवधयू०पी० में |

समय की कमी के कारण कुछ टाइम लग सकता पर सभी का शुद्ध इतिहास बताया जायेगा.आप को धन्यवाद वेबसाइट पर आने के लिए.
ReplyDeleteकछवाया चौहान
ReplyDeleteका इतिहास